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दुर्गाहिंदू देवीBy समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाबकिसी अन्य भाषा में पढ़ेंडाउनलोड करेंध्यान रखेंसंपादित करेंदुर्गा हिन्दुओं की प्रमुख देवी हैं जिन्हें देवी, शक्ति और जग्दम्बा भी कहते हैं । शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं जिनकी तुलना परम ब्रह्म से की जाती है। दुर्गा को आदि शक्ति, प्रधान प्रकृति, गुणवती योगमाया, बुद्धितत्व की जननी तथा विकार रहित बताया गया है। वह अंधकार व अज्ञानता रुपी राक्षसों से रक्षा करने वाली तथा कल्याणकारी हैं। उनके बारे में मान्यता है कि वे शान्ति, समृद्धि तथा धर्म पर आघात करने वाली राक्षसी शक्तियों का विनाश करतीं हैं।[3]दुर्गाशक्ति / विजयDurga Mahisasuramardini.JPGदुर्गा के महुषासुरमर्दिनी रूप का चित्रदेवनागरी दुर्गासंबंध शक्ति अवतारमंत्र ॐ दुर्गा देव्यै नमःॐ एं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥ ॐ ह्री दुं दुर्गाय नमःअस्त्र त्रिशूल, चक्र,गदा, धनुष,शंख, तलवार,कमल, तीर, अभयहस्तजीवनसाथी शिवसवारी बाघ सिंहदुर्गा पूजा का पांडाल, 2011दुर्गा का निरूपण सिंह पर सवार एक देवी के रूप में की जाती है। दुर्गा देवी आठ भुजाओं से युक्त हैं जिन सभी में कोई न कोई शस्त्रास्त्र होते है। उन्होने महिषासुर नामक असुर का वध किया। महिषासुर (= महिष + असुर = भैंसा जैसा असुर) करतीं हैं। हिन्दू ग्रन्थों में वे शिव की पत्नी दुर्गा के रूप में वर्णित हैं। जिन ज्योतिर्लिंगों में देवी दुर्गा की स्थापना रहती है उनको सिद्धपीठ कहते है। वहाँ किये गए सभी संकल्प पूर्ण होते है। माता का दुर्गा देवी नाम दुर्गम नाम के महान दैत्य का वध करने के कारण पड़ा। माता ने शताक्षी स्वरूप धारण किया और उसके बाद शाकंभरी देवी के नाम से विख्यात हुई शाकंभरी देवी ने ही दुर्गमासुर का वध किया। जिसके कारण वे समस्त ब्रह्मांड में दुर्गा देवी के नाम से भी विख्यात हो गई। माता के देश में अनेकों मंदिर हैं कहीं पर महिषासुरमर्दिनि शक्तिपीठ तो कहीं पर कामाख्या देवी। यही देवी कोलकाता में महाकाली के नाम से विख्यात और सहारनपुर के प्राचीन शक्तिपीठ मे शाकम्भरी देवी के रूप में ये ही पूजी जाती हैं।हिन्दुओं के शक्ति साम्प्रदाय में भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च देवता माना जाता है (शाक्त साम्प्रदाय ईश्वर को देवी के रूप में मानता है)। वेदों में तो दुर्गा का व्यापाक उल्लेख है, किन्तु उपनिषद में देवी "उमा हैमवती" (उमा, हिमालय की पुत्री) का वर्णन है। पुराण में दुर्गा को आदिशक्ति माना गया है। दुर्गा असल में शिव की पत्नी आदिशक्ति का एक रूप हैं, शिव की उस पराशक्ति को प्रधान प्रकृति, गुणवती माया, बुद्धितत्व की जननी तथा विकाररहित बताया गया है। एकांकी (केंद्रित) होने पर भी वह माया शक्ति संयोगवश अनेक हो जाती है। उस आदि शक्ति देवी ने ही सावित्री(ब्रह्मा जी की पहली पत्नी), लक्ष्मी, और पार्वती(सती) के रूप में जन्म लिया और उसने ब्रह्मा, विष्णु और महेश से विवाह किया था। तीन रूप होकर भी दुर्गा (आदि शक्ति) एक ही है।देवी दुर्गा के स्वयं कई रूप हैं (सावित्री, लक्ष्मी एव पार्वती से अलग)। मुख्य रूप उनका "गौरी" है, अर्थात शान्तमय, सुन्दर और गोरा रूप। उनका सबसे भयानक रूप "काली" है, अर्थात काला रूप। विभिन्न रूपों में दुर्गा भारत और नेपाल के कई मन्दिरों और तीर्थस्थानों में पूजी जाती हैं।भगवती दुर्गा की सवारी शेर है।मार्कण्डेय पुराण में ब्रहदेव ने मनुष्‍य जाति की रक्षा के लिए एक परम गुप्‍त, परम उपयोगी और मनुष्‍य का कल्‍याणकारी देवी कवच एवं व देवी सुक्‍त बताया है और कहा है कि जो मनुष्‍य इन उपायों को करेगा, वह इस संसार में सुख भोग कर अन्‍त समय में बैकुण्‍ठ को जाएगा। ब्रहदेव ने कहा कि जो मनुष्‍य दुर्गा सप्तशती का पाठ करेगा उसे सुख मिलेगा। भगवत पुराण के अनुसार माँ जगदम्‍बा का अवतरण श्रेष्‍ठ पुरूषो की रक्षा के लिए हुआ है। जबकि श्रीं मद देवीभागवत के अनुसार वेदों और पुराणों कि रक्षा के और दुष्‍टों के दलन के लिए माँ जगदंबा का अवतरण हुआ है। इसी तरह से ऋगवेद के अनुसार माँ दुर्गा ही आदि-शक्ति है, उन्‍ही से सारे विश्‍व का संचालन होता है और उनके अलावा और कोई अविनाशी नही है।इसीलिए नवरात्रि के दौरान नव दुर्गा के नौ रूपों का ध्‍यान, उपासना व आराधना की जाती है तथा नवरात्रि के प्रत्‍येक दिन मां दुर्गा के एक-एक शक्ति रूप का पूजन किया जाता है।दुर्गा के 108 नाम संपादित करें दुर्गा सप्तशती के अनुसार इनके 108 नाम बताये गये हैं।1. सती : अग्नि में जल कर भी जीवित होने वाली2. साध्वी : आशावादी3. भवप्रीता : भगवान् शिव पर प्रीति रखने वाली4. भवानी : ब्रह्मांड की निवास5. भवमोचनी : संसार बंधनों से मुक्त करने वाली6. आर्या : देवी7. दुर्गा : अपराजेय8. जया : विजयी9. आद्या : शुरूआत की वास्तविकता10. त्रिनेत्र : तीन आँखों वाली11. शूलधारिणी : शूल धारण करने वाली12. पिनाकधारिणी : शिव का त्रिशूल धारण करने वाली13. चित्रा : सुरम्य, सुन्दर14. चंद्रघण्टा : प्रचण्ड स्वर से घण्टा नाद करने वाली, घंटे की आवाज निकालने वाली15. महातपा : भारी तपस्या करने वाली16. मन : मनन- शक्ति17. बुद्धि : सर्वज्ञाता18. अहंकारा : अभिमान करने वाली19. चित्तरूपा : वह जो सोच की अवस्था में है20. चिता : मृत्युशय्या21. चिति : चेतना22. सर्वमन्त्रमयी : सभी मंत्रों का ज्ञान रखने वाली23. सत्ता : सत्-स्वरूपा, जो सब से ऊपर है24. सत्यानन्दस्वरूपिणी : अनन्त आनंद का रूप25. अनन्ता : जिनके स्वरूप का कहीं अन्त नहीं26. भाविनी : सबको उत्पन्न करने वाली, खूबसूरत औरत27. भाव्या : भावना एवं ध्यान करने योग्य28. भव्या : कल्याणरूपा, भव्यता के साथ29. अभव्या : जिससे बढ़कर भव्य कुछ नहीं30. सदागति : हमेशा गति में, मोक्ष दान31. शाम्भवी : शिवप्रिया, शंभू की पत्नी32. देवमाता : देवगण की माता33. चिन्ता : चिन्ता34. रत्नप्रिया : गहने से प्यार35. सर्वविद्या : ज्ञान का निवास36. दक्षकन्या : दक्ष की बेटी37. दक्षयज्ञविनाशिनी : दक्ष के यज्ञ को रोकने वाली38. अपर्णा : तपस्या के समय पत्ते को भी न खाने वाली39. अनेकवर्णा : अनेक रंगों वाली40. पाटला : लाल रंग वाली41. पाटलावती : गुलाब के फूल या लाल परिधान या फूल धारण करने वाली42. पट्टाम्बरपरीधाना : रेशमी वस्त्र पहनने वाली43. कलामंजीरारंजिनी : पायल को धारण करके प्रसन्न रहने वाली44. अमेय : जिसकी कोई सीमा नहीं45. विक्रमा : असीम पराक्रमी46. क्रूरा : दैत्यों के प्रति कठोर47. सुन्दरी : सुंदर रूप वाली48. सुरसुन्दरी : अत्यंत सुंदर49. वनदुर्गा : जंगलों की देवी, बनशंकरी अथवा शाकम्भरी50. मातंगी : मतंगा की देवी51. मातंगमुनिपूजिता : बाबा मतंगा द्वारा पूजनीय52. ब्राह्मी : भगवान ब्रह्मा की शक्ति53. माहेश्वरी : प्रभु शिव की शक्ति54. इंद्री : इन्द्र की शक्ति55. कौमारी : किशोरी56. वैष्णवी : अजेय57. चामुण्डा : चंड और मुंड का नाश करने वाली58. वाराही : वराह पर सवार होने वाली59. लक्ष्मी : सौभाग्य की देवी60. पुरुषाकृति : वह जो पुरुष धारण कर ले61. विमिलौत्त्कार्शिनी : आनन्द प्रदान करने वाली62. ज्ञाना : ज्ञान से भरी हुई63. क्रिया : हर कार्य में होने वाली64. नित्या : अनन्त65. बुद्धिदा : ज्ञान देने वाली66. बहुला : विभिन्न रूपों वाली67. बहुलप्रेमा : सर्व प्रिय68. सर्ववाहनवाहना : सभी वाहन पर विराजमान होने वाली69. निशुम्भशुम्भहननी : शुम्भ, निशुम्भ का वध करने वाली70. महिषासुरमर्दिनि : महिषासुर का वध करने वाली71. मधुकैटभहंत्री : मधु व कैटभ का नाश करने वाली72. चण्डमुण्ड विनाशिनि : चंड और मुंड का नाश करने वाली73. सर्वासुरविनाशा : सभी राक्षसों का नाश करने वाली74. सर्वदानवघातिनी : संहार के लिए शक्ति रखने वाली75. सर्वशास्त्रमयी : सभी सिद्धांतों में निपुण76. सत्या : सच्चाई77. सर्वास्त्रधारिणी : सभी हथियारों धारण करने वाली78. अनेकशस्त्रहस्ता : हाथों में कई हथियार धारण करने वाली79. अनेकास्त्रधारिणी : अनेक हथियारों को धारण करने वाली80. कुमारी : सुंदर किशोरी81. एककन्या : कन्या82. कैशोरी : जवान लड़की83. युवती : नारी84. यति : तपस्वी85. अप्रौढा : जो कभी पुराना ना हो86. प्रौढा : जो पुराना है87. वृद्धमाता : शिथिल88. बलप्रदा : शक्ति देने वाली89. महोदरी : ब्रह्मांड को संभालने वाली90. मुक्तकेशी : खुले बाल वाली91. घोररूपा : एक भयंकर दृष्टिकोण वाली92. महाबला : अपार शक्ति वाली93. अग्निज्वाला : मार्मिक आग की तरह94. रौद्रमुखी : विध्वंसक रुद्र की तरह भयंकर चेहरा95. कालरात्रि : काले रंग वाली96. तपस्विनी : तपस्या में लगे हुए97. नारायणी : भगवान नारायण की विनाशकारी रूप98. भद्रकाली : काली का भयंकर रूप99. विष्णुमाया : भगवान विष्णु का जादू100. जलोदरी : ब्रह्मांड में निवास करने वाली101.102.103.104.105.106.107.108.सती दुर्गा जी एक नाम है। दक्ष ने अपने यज्ञ में सभी देवताओं को आमंत्रित किया , लेकिन शिव और सती को आमंत्रण नहीं दिया। इससे क्रुद्ध होकर, अपमान का प्रतिकार करने के लिए इन्होंने उग्रचंडी के रूप में अपने पिता के यज्ञ का विध्वंस किया था। इनके हाथों की संख्या १८ मानी जाती है। आश्विन महीने में कृष्णपक्ष की नवमी दिन शाक्तमतावलंबी विशेष रूप से उग्रचंडी की पूजा करते हैं।दीर्घा संपादित करेंदुर्गा पूजा में स्थापित दुर्गा प्रतिमा Durga Mahisasuramardini.JPG दुर्गा की स्वर्ण प्रतिमा Goddess Maheshwari (देवी महेश्वरी).png Goddesses (2672698653).jpg Durga, Burdwan, 2011.JPG Goddess Durga Maa 2.jpg Goddess Durga Maa.jpgइन्हें भी देखें संपादित करें दुर्गा पूजा शक्ति शाक्त सम्प्रदाय पान्थोइबी देवीमाहात्म्य नवदुर्गा महाविद्या दुर्गा सप्तशती के सिद्ध-मंत्रबाल वनिता महिला आश्रमसन्दर्भ संपादित करें↑" मूल से 15 जून 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 27 सितंबर 2017.↑ Paul Reid-Bowen 2012, pp. 212-213.बाहरी कड़ियाँ संपादित करें दुर्गा के Vnita प्रसिद्ध मंदिर

दुर्गा हिन्दुओं की प्रमुख देवी हैं जिन्हें  देवी,  शक्ति और जग्दम्बा भी कहते हैं ।  शाक्त  सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं जिनकी तुलना परम  ब्रह्म से की जाती है। दुर्गा को आदि शक्ति, प्रधान प्रकृति, गुणवती योगमाया, बुद्धितत्व की जननी तथा विकार रहित बताया गया है। वह अंधकार व अज्ञानता रुपी राक्षसों से रक्षा करने वाली तथा कल्याणकारी हैं। उनके बारे में मान्यता है कि वे शान्ति, समृद्धि तथा धर्म पर आघात करने वाली राक्षसी शक्तियों का विनाश करतीं हैं।[3]

दुर्गा
शक्ति / विजय
Durga Mahisasuramardini.JPG
दुर्गा के महुषासुरमर्दिनी रूप का चित्र
देवनागरीदुर्गा
संबंध शक्ति  अवतार
मंत्रॐ दुर्गा देव्यै नमः
ॐ एं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥ ॐ ह्री दुं दुर्गाय नमः
अस्त्रत्रिशूलचक्र,
गदाधनुष,
शंखतलवार,
कमलतीर, अभयहस्त
जीवनसाथीशिव
सवारीबाघ सिंह
दुर्गा पूजा का पांडाल, 2011

दुर्गा का निरूपण  सिंह पर सवार एक  देवी के रूप में की जाती है। दुर्गा देवी आठ भुजाओं से युक्त हैं जिन सभी में कोई न कोई शस्त्रास्त्र होते है। उन्होने  महिषासुर नामक असुर का वध किया। महिषासुर (= महिष + असुर = भैंसा जैसा असुर) करतीं हैं। हिन्दू ग्रन्थों में वे  शिव की पत्नी दुर्गा के रूप में वर्णित हैं। जिन ज्योतिर्लिंगों में देवी दुर्गा की स्थापना रहती है उनको सिद्धपीठ कहते है। वहाँ किये गए सभी संकल्प पूर्ण होते है। माता का दुर्गा देवी नाम दुर्गम नाम के महान दैत्य का वध करने के कारण पड़ा। माता ने शताक्षी स्वरूप धारण किया और उसके बाद शाकंभरी देवी के नाम से विख्यात हुई शाकंभरी देवी ने ही दुर्गमासुर का वध किया। जिसके कारण वे समस्त ब्रह्मांड में दुर्गा देवी के नाम से भी विख्यात हो गई। माता के देश में अनेकों मंदिर हैं कहीं पर महिषासुरमर्दिनि शक्तिपीठ तो कहीं पर कामाख्या देवी। यही देवी कोलकाता में महाकाली के नाम से विख्यात और सहारनपुर के प्राचीन शक्तिपीठ मे  शाकम्भरी देवी के रूप में ये ही पूजी जाती हैं।

हिन्दुओं के शक्ति साम्प्रदाय में भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च देवता माना जाता है (शाक्त साम्प्रदाय  ईश्वर को देवी के रूप में मानता है)।  वेदों में तो दुर्गा का व्यापाक उल्लेख है, किन्तु  उपनिषद में देवी "उमा हैमवती" (उमा, हिमालय की पुत्री) का वर्णन है।  पुराण में दुर्गा को आदिशक्ति माना गया है। दुर्गा असल में  शिव की पत्नी  आदिशक्ति का एक रूप हैं, शिव की उस पराशक्ति को प्रधान प्रकृति, गुणवती माया, बुद्धितत्व की जननी तथा विकाररहित बताया गया है। एकांकी (केंद्रित) होने पर भी वह माया शक्ति संयोगवश अनेक हो जाती है। उस आदि शक्ति देवी ने ही सावित्री(ब्रह्मा जी की पहली पत्नी), लक्ष्मी, और पार्वती(सती) के रूप में जन्म लिया और उसने ब्रह्मा, विष्णु और महेश से विवाह किया था। तीन रूप होकर भी दुर्गा (आदि शक्ति) एक ही है।

देवी दुर्गा के स्वयं कई रूप हैं (सावित्री, लक्ष्मी एव पार्वती से अलग)। मुख्य रूप उनका "गौरी" है, अर्थात शान्तमय, सुन्दर और गोरा रूप। उनका सबसे भयानक रूप "काली" है, अर्थात काला रूप। विभिन्न रूपों में दुर्गा  भारत और  नेपाल के कई मन्दिरों और तीर्थस्थानों में पूजी जाती हैं।भगवती दुर्गा की सवारी शेर है।

मार्कण्डेय पुराण में ब्रहदेव ने मनुष्‍य जाति की रक्षा के लिए एक परम गुप्‍त, परम उपयोगी और मनुष्‍य का कल्‍याणकारी देवी कवच एवं व देवी सुक्‍त बताया है और कहा है कि जो मनुष्‍य इन उपायों को करेगा, वह इस संसार में सुख भोग कर अन्‍त समय में बैकुण्‍ठ को जाएगा। ब्रहदेव ने कहा कि जो मनुष्‍य दुर्गा सप्तशती का पाठ करेगा उसे सुख मिलेगा। भगवत पुराण के अनुसार माँ जगदम्‍बा का अवतरण श्रेष्‍ठ पुरूषो की रक्षा के लिए हुआ है। जबकि श्रीं मद देवीभागवत के अनुसार वेदों और पुराणों कि रक्षा के और दुष्‍टों के दलन के लिए माँ जगदंबा का अवतरण हुआ है। इसी तरह से ऋगवेद के अनुसार माँ दुर्गा ही आदि-शक्ति है, उन्‍ही से सारे विश्‍व का संचालन होता है और उनके अलावा और कोई अविनाशी नही है।

इसीलिए नवरात्रि के दौरान नव दुर्गा के नौ रूपों का ध्‍यान, उपासना व आराधना की जाती है तथा नवरात्रि के प्रत्‍येक दिन मां दुर्गा के एक-एक शक्ति रूप का पूजन किया जाता है।

दुर्गा के 108 नाम संपादित करें

 दुर्गा  सप्तशती के अनुसार इनके 108 नाम बताये गये हैं।

  • 1.  सती :  अग्नि में जल कर भी जीवित होने वाली
  • 2. साध्वी : आशावादी
  • 3. भवप्रीता : भगवान् शिव पर प्रीति रखने वाली
  • 4. भवानी : ब्रह्मांड की निवास
  • 5. भवमोचनी : संसार बंधनों से मुक्त करने वाली
  • 6. आर्या : देवी
  • 7. दुर्गा : अपराजेय
  • 8. जया : विजयी
  • 9. आद्या : शुरूआत की वास्तविकता
  • 10. त्रिनेत्र : तीन आँखों वाली
  • 11. शूलधारिणी : शूल धारण करने वाली
  • 12. पिनाकधारिणी : शिव का त्रिशूल धारण करने वाली
  • 13. चित्रा : सुरम्य, सुन्दर
  • 14. चंद्रघण्टा : प्रचण्ड स्वर से घण्टा नाद करने वाली, घंटे की आवाज निकालने वाली
  • 15. महातपा : भारी तपस्या करने वाली
  • 16. मन : मनन- शक्ति
  • 17. बुद्धि : सर्वज्ञाता
  • 18. अहंकारा : अभिमान करने वाली
  • 19. चित्तरूपा : वह जो सोच की अवस्था में है
  • 20. चिता : मृत्युशय्या
  • 21. चिति : चेतना
  • 22. सर्वमन्त्रमयी : सभी मंत्रों का ज्ञान रखने वाली
  • 23. सत्ता : सत्-स्वरूपा, जो सब से ऊपर है
  • 24. सत्यानन्दस्वरूपिणी : अनन्त आनंद का रूप
  • 25. अनन्ता : जिनके स्वरूप का कहीं अन्त नहीं
  • 26. भाविनी : सबको उत्पन्न करने वाली, खूबसूरत औरत
  • 27. भाव्या : भावना एवं ध्यान करने योग्य
  • 28. भव्या : कल्याणरूपा, भव्यता के साथ
  • 29. अभव्या : जिससे बढ़कर भव्य कुछ नहीं
  • 30. सदागति : हमेशा गति में, मोक्ष दान
  • 31. शाम्भवी : शिवप्रिया, शंभू की पत्नी
  • 32. देवमाता : देवगण की माता
  • 33. चिन्ता : चिन्ता
  • 34. रत्नप्रिया : गहने से प्यार
  • 35. सर्वविद्या : ज्ञान का निवास
  • 36. दक्षकन्या : दक्ष की बेटी
  • 37. दक्षयज्ञविनाशिनी : दक्ष के यज्ञ को रोकने वाली
  • 38. अपर्णा : तपस्या के समय पत्ते को भी न खाने वाली
  • 39. अनेकवर्णा : अनेक रंगों वाली
  • 40. पाटला : लाल रंग वाली
  • 41. पाटलावती : गुलाब के फूल या लाल परिधान या फूल धारण करने वाली
  • 42. पट्टाम्बरपरीधाना : रेशमी वस्त्र पहनने वाली
  • 43. कलामंजीरारंजिनी : पायल को धारण करके प्रसन्न रहने वाली
  • 44. अमेय : जिसकी कोई सीमा नहीं
  • 45. विक्रमा : असीम पराक्रमी
  • 46. क्रूरा : दैत्यों के प्रति कठोर
  • 47. सुन्दरी : सुंदर रूप वाली
  • 48. सुरसुन्दरी : अत्यंत सुंदर
  • 49. वनदुर्गा : जंगलों की देवी, बनशंकरी अथवा शाकम्भरी
  • 50. मातंगी : मतंगा की देवी
  • 51. मातंगमुनिपूजिता : बाबा मतंगा द्वारा पूजनीय
  • 52. ब्राह्मी : भगवान ब्रह्मा की शक्ति
  • 53. माहेश्वरी : प्रभु शिव की शक्ति
  • 54. इंद्री : इन्द्र की शक्ति
  • 55. कौमारी : किशोरी
  • 56. वैष्णवी : अजेय
  • 57. चामुण्डा : चंड और मुंड का नाश करने वाली
  • 58. वाराही : वराह पर सवार होने वाली
  • 59. लक्ष्मी : सौभाग्य की देवी
  • 60. पुरुषाकृति : वह जो पुरुष धारण कर ले
  • 61. विमिलौत्त्कार्शिनी : आनन्द प्रदान करने वाली
  • 62. ज्ञाना : ज्ञान से भरी हुई
  • 63. क्रिया : हर कार्य में होने वाली
  • 64. नित्या : अनन्त
  • 65. बुद्धिदा : ज्ञान देने वाली
  • 66. बहुला : विभिन्न रूपों वाली
  • 67. बहुलप्रेमा : सर्व प्रिय
  • 68. सर्ववाहनवाहना : सभी वाहन पर विराजमान होने वाली
  • 69. निशुम्भशुम्भहननी : शुम्भ, निशुम्भ का वध करने वाली
  • 70. महिषासुरमर्दिनि : महिषासुर का वध करने वाली
  • 71. मधुकैटभहंत्री : मधु व कैटभ का नाश करने वाली
  • 72. चण्डमुण्ड विनाशिनि : चंड और मुंड का नाश करने वाली
  • 73. सर्वासुरविनाशा : सभी राक्षसों का नाश करने वाली
  • 74. सर्वदानवघातिनी : संहार के लिए शक्ति रखने वाली
  • 75. सर्वशास्त्रमयी : सभी सिद्धांतों में निपुण
  • 76. सत्या : सच्चाई
  • 77. सर्वास्त्रधारिणी : सभी हथियारों धारण करने वाली
  • 78. अनेकशस्त्रहस्ता : हाथों में कई हथियार धारण करने वाली
  • 79. अनेकास्त्रधारिणी : अनेक हथियारों को धारण करने वाली
  • 80. कुमारी : सुंदर किशोरी
  • 81. एककन्या : कन्या
  • 82. कैशोरी : जवान लड़की
  • 83. युवती : नारी
  • 84. यति : तपस्वी
  • 85. अप्रौढा : जो कभी पुराना ना हो
  • 86. प्रौढा : जो पुराना है
  • 87. वृद्धमाता : शिथिल
  • 88. बलप्रदा : शक्ति देने वाली
  • 89. महोदरी : ब्रह्मांड को संभालने वाली
  • 90. मुक्तकेशी : खुले बाल वाली
  • 91. घोररूपा : एक भयंकर दृष्टिकोण वाली
  • 92. महाबला : अपार शक्ति वाली
  • 93. अग्निज्वाला : मार्मिक आग की तरह
  • 94. रौद्रमुखी : विध्वंसक रुद्र की तरह भयंकर चेहरा
  • 95. कालरात्रि : काले रंग वाली
  • 96. तपस्विनी : तपस्या में लगे हुए
  • 97. नारायणी : भगवान नारायण की विनाशकारी रूप
  • 98. भद्रकाली : काली का भयंकर रूप
  • 99. विष्णुमाया : भगवान विष्णु का जादू
  • 100. जलोदरी : ब्रह्मांड में निवास करने वाली
  • 101.
  • 102.
  • 103.
  • 104.
  • 105.
  • 106.
  • 107.
  • 108.

सती दुर्गा जी एक नाम है। दक्ष ने अपने यज्ञ में सभी देवताओं को आमंत्रित किया , लेकिन शिव और सती को आमंत्रण नहीं दिया। इससे क्रुद्ध होकर, अपमान का प्रतिकार करने के लिए इन्होंने उग्रचंडी के रूप में अपने पिता के यज्ञ का विध्वंस किया था। इनके हाथों की संख्या १८ मानी जाती है। आश्विन महीने में कृष्णपक्ष की नवमी दिन शाक्तमतावलंबी विशेष रूप से उग्रचंडी की पूजा करते हैं।

दीर्घा संपादित  करें

इन्हें भी देखें संपादित करें

सन्दर्भ संपादित करें

  1. " मूल से 15 जून 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 27 सितंबर 2017.
  2.  Paul Reid-Bowen 2012, pp. 212-213.

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मां दुर्गा की भेंट

मां दुर्गा की भेंट ______________ मन उपवन के फूल माँ तुमको चढ़ाऊँ कैसे हमतो पहाड़ों की गुफ़ाओं में तुमको ही ढूँढा करते हैं हो माँ तुमको ही ढूँढा करते हैं कहाँ छुप गई है मैया हमारी,कहाँ खोगई है माँ ममता तुम्हारी चैन नहीं बैचैन मेरा मन में लगन है कि दर्शन हो तेरा ढूँढूँ कहाँ आजा तू माँ हमतो पहाड़ों की गुफ़ाओं में तुमही को ढूँढा करते हैं करदो माँ पूरी इच्छा हमारी,सदियों से रोए माँ अँखियाँ हमारी आजा तू माँ ढूँढूँ कहाँ । हम तो पहाड़ों की …………… टेढ़ी डगर है माँ लम्बा सफ़र है तेरा हाथ सर पे माँ हमें क्या फ़िकर है आजा तू माँ ढूँढूँ कहाँ हमतो पहाड़ों की गुफ़ाओं में तुमही को ढूँढा करते हैं हो माँ तुमही को ढूँढा करते हैं ********************************************* माता की भेंट माँ मेरी विपदा दूर करो,  माँ मेरी विपदा दूर करो तेरी शरण में अाया हूँ ,  आकर मेरे कष्ट हरो तू ही अम्बे काली है दुखड़े हरने वाली है चरण पड़े की लाज रखो  माँ मेरी विपदा दूर करो भक्तो ने तुझे पुकारा है तूने दिया सहारा है विनती पे मेरी ध्यान धरो  माँ मेरी विपदा दूर करो शरण तुम्हारी आये है इस जग के ठुकराये है पाप ताप सन्...

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दुर्गा माँBy समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाबदेवी दुर्गा ब्रह्माण्ड की जननी देवी का एक अवतार हैं और उन्हें दुनिया के निर्माण, संरक्षण और विनाश के पीछे की ताकत माना जाता है। माँ दुर्गा, जिसका अर्थ है संस्कृत में अजेय, को 10 भुजाओं के रूप में चित्रित किया जाता है, जो बाघ या शेर पर सवार होती हैं। वह अपने हाथों में विभिन्न हथियार रखती हैं जिसमें भगवान विष्णु का चक्र और भगवान शिव का एक कमल का फूल भी शामिल है। देवी दुर्गा अपने चेहरे पर ध्यानपूर्ण मुस्कान से सजी मुद्रा या हाथ के इशारों का अभ्यास करती दिखाई देती हैं। ऐसा माना जाता है कि वह शक्ति का अवतार है और स्वेतन्त्र्य या आत्मनिर्भरता की स्थिति में विद्यमान है। हिंदू देवी दुर्गा तब प्रकट हुई जब देवताओं को महिषासुर की राक्षसी और बुरी शक्तियों से खतरा था। सभी देवताओं ने अपने दिव्य तेज को एकजुट किया और महिषासुर के नेतृत्व में राक्षसों को जीतने के लिए उसे बनाया।परम पूज्य देवी, दुर्गा का वर्णन तत्यारेय ब्राह्मण, तैत्तिरीय-अरण्यका, वाजसनेयी संहिता और यजुर वेद जैसी विभिन्न पांडुलिपियों में किया गया है। इसके अलावा, दुर्गा की उत्पत्ति और गतिविधियों की चर्चा देवी महात्म्यम में आगे की गई है। दुर्गा, भगवान शिव की पत्नी पार्वती का एक और पहलू है। देवी काली को उनके अवतारों में से एक माना जाता है। उन्हें दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान गणेश, कार्तिकेय, लक्ष्मी और सरस्वती की माँ के रूप में चित्रित किया जाता है, जिन्हें अश्विन के महीने में मनाया जाने वाला नवरात्रि भी कहा जाता है।देवी दुर्गा की उत्पत्तिदेवी महात्म्यम के अनुसार, देवी दुर्गा का गठन असुर महिष से लड़ने के लिए एक योद्धा देवी के रूप में किया गया था। दानव ने पृथ्वी, स्वर्ग और नरक को आतंकित कर दिया था और देवता उसे हराने में विफल रहे क्योंकि भगवान ब्रह्मा ने उन्हें एक पुरुष द्वारा पराजित नहीं होने का वरदान दिया था। ब्रह्मा के नेतृत्व में देवताओं ने विष्णु और शिव से मदद के लिए संपर्क किया। पवित्र त्रिमूर्ति ने तब अपनी दिव्य चमक को एकजुट किया और देवी दुर्गा प्रकट हुईं। वह महिषासुर का सफाया करने और सभी दिव्य प्राणियों को बचाने के लिए उभरी थी। उसने शिव के त्रिशूल, विष्णु के चक्र, ब्रह्मा के कमंडलु, इंद्र के वज्र, कुबेर के रत्नहार आदि विभिन्न देवताओं से अपने हथियार प्राप्त किए।बाल वनिता महिला आश्रमराक्षसी महिषासुर ने उन दोनों के बीच एक लड़ाई में उसके बदलते रूपों के खिलाफ एक उग्र लड़ाई लड़ी, लेकिन आखिरकारदुर्गा माँ ने उसका वाढ कर दिया। इस प्रकार, वह महिषासुरमर्दिनी के रूप में भी जानी जाती है – महिषासुर का वध करने वाली।अपने विभिन्न पहलुओं में देवी की पूजा शरद ऋतु में की जाती है, जो बंगाल में फसल के मौसम के उद्घाटन का प्रतीक है। दुर्गा की शरदकालीन पूजा में, उनका पहला प्रतिनिधि बिल्व वृक्ष की एक शाखा है। दूसरे चरण में प्रतिनिधि नवपात्रिका है – मादा वृक्ष, अन्य पौधों और जड़ी-बूटियों के पेड़ के साथ बनाया गया। इसके अलावा मां को अक्सर चावल (धान्यरूप) के साथ पूजा में पहचाना जाता है। दुर्गा का एक उपपत्नी शाकाम्वरी है, अर्थात जड़ी-बूटी पौष्टिक देवी।देवी दुर्गा की कथादेवी दुर्गा को देवी का अवतार माना जाता है जिसके कई रूप हैं। देवी कई किंवदंतियों से जुड़ी हुई हैं जैसे कि पार्वती और भगवान शिव की कथा, रावण, शिव और पार्वती की कथा, भगवान राम और दुर्गा की कथा और विष्णु की पौराणिक कथा पार्वती की कथा।देवी दुर्गा के अवतारदेवी दुर्गा के कई अवतार और अवतार हैं, जैसे गौरी, भवानी, ललिता, कमंडलिनी, राजेश्वरी, जावा आदि। इनके अलावा, उनके 9 अन्य पदनाम भी हैं जिन्हें नव दुर्गा, ब्रह्मचारिणी, शैलपुत्री, चंद्रघंटा, कालरात्रि, स्कंदमाता, सिद्धिदात्री, महागौरी, कुसुमंदा और कात्यायनी के नाम से भी जाना जाता है। दुर्गा के अन्य अवतारों में पार्वती, करुणामयी, अंबिका और काली शामिल हैं।देवी दुर्गा की विशेषताएँ और प्रतीकआमतौर पर, देवी दुर्गा को लाल रंग के कपड़े (साड़ी) पहनाया जाता है, जहां रंग लाल कार्रवाई और बुराई से सुरक्षा का प्रतीक है। उसे कई वस्तुओं को ले जाने वाली 10 या 8 भुजाओं का प्रतिनिधित्व किया जाता है, जो हिंदू धर्म में 10 दिशाओं या 8 चौकों का प्रतीक है, जो यह भी दर्शाता है कि वह भक्तों को सभी दिशाओं से बचाता है। दुर्गा को 3 आँखें होने के रूप में भी चित्रित किया गया है और इस प्रकार, उन्हें त्रयम्बक भी कहा जाता है जिसका अर्थ है 3 आँखें देवी। दाईं आंख सूर्य द्वारा प्रतीक कार्रवाई का प्रतीक है, बाईं आंख चंद्रमा की ओर संकेत करती है; और केंद्रीय नेत्र अग्नि के प्रतीक ज्ञान को दर्शाता है।पूँजीवादी पितृसत्ता एक साथ निजीकरण और मातृत्व से प्यार करने वाली माताओं और स्वस्थ शिशुओं के संस्थागतकरण की है। गंगा के डेल्टा में बंगालियों की विशिष्ट पहचान के रूप में उभरने के साथ, टेंडर मदरहुड की भावना की पुष्टि प्राकृतिक सेटिंग में हुई, जिसे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इतनी स्पष्ट रूप से अच्छी तरह से पानी और उपजाऊ (सुजलान सुपहलंग, शस्यश्यामलांग) बताया। मिट्टी की प्राकृतिक इनाम ने एक स्नेही माँ के रूप में बंगाल के प्रतिनिधित्व को प्रोत्साहित किया, जो अपने बच्चों की मांगों का जवाब देने के लिए तैयार थी। धार्मिक दुर्जनों के अलावा, देवी दुर्गा राष्ट्रवाद और अर्थव्यवस्था के स्तंभों के बीच अपने मावेरिक्स का नक्शा बनाती हैं। वह सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्वव्यापी देवता है।शेर या बाघ को आमतौर पर दुर्गा के वाहन के रूप में देखा जाता है। सिंह में शक्ति, दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति को दर्शाया गया है। शेर की सवारी करने वाली देवी दुर्गा इन गुणों पर उनकी विशेषज्ञता का प्रतीक हैं। दुर्गा को अभय मुद्रा स्थिति में शेर पर देखा जाता है, जो भय से मुक्ति का प्रमाण देता है। एक जीव में सभी कोशिकाओं का कुल योग एक व्यक्ति होता है, इसलिए प्रत्येक कोशिका एक कोशिका की तरह होती है और उनका योग भगवान होता है और उससे परे वह निरपेक्ष होता है।देवी दुर्गा के अस्त्र शस्त्रदेवी दुर्गा के पास कई अस्त्र शस्त्र हैं। उसके हाथ में शंख डरा हुआ ओम या प्रणव का प्रतिनिधित्व करता है; वज्र दृढ़ता का प्रतिनिधित्व करता है; धनुष और तीर ऊर्जा का प्रतीक है; सुदर्शन चक्र जो उंगली पर घूमता है, यह दर्शाता है कि पूरी दुनिया उसके लिए आज्ञाकारी है और उसकी आज्ञा पर है; देवी दुर्गा द्वारा रखी गई तलवार ज्ञान का प्रतिनिधित्व करती है जो संदेह से बंधी नहीं है; त्रिशूल या त्रिशूल 3 अलग-अलग गुणों का प्रतीक है, राजस (गतिविधि), सतवा (निष्क्रियता) और तमस (गैर-गतिविधि)। वह मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक अर्थात् दुखों के 3 रूपों का उन्मूलनकर्ता भी है। देवी दुर्गा द्वारा धारण किया गया कमल, पूरी तरह से फूला नहीं समाता, सफलता का आश्वासन देता है, लेकिन अंतिमता नहीं।देवी दुर्गा की पूजादेवी दुर्गा की पूजा पूरे देश में की जाती है। दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, असम, झारखंड और बिहार में प्रमुख वार्षिक त्योहार है। महिषासुर पर दुर्गा की विजय दशहरे के रूप में मनाई जाती है, जिसे बंगाली में विजयदशमी के रूप में भी जाना जाता है। दशहरा को उत्तर भारत में रावण के खिलाफ राम की जीत के रूप में भी मनाया जाता है। देवी दुर्गा को कश्मीर में शारिका के रूप में पूजा जाता है। नवरात्रि भक्ति के दौरान शक्ति उपासक देवी के 9 पहलुओं पर ध्यान करते हैं, जिन्हें नव दुर्गा के रूप में जाना जाता है। दशहरा नवरात्रि दक्षिण भारत में भी मनाया जाता है। देवी दुर्गा को मैसूर में चामुंडेश्वरी कहा जाता है।नवरात्रि पूरे गुजरात में मनाई जाती है और अंतिम दिन महिषासुरमर्दिनी की विजय के उपलक्ष्य में गरबा का आयोजन किया जाता है। गोवा में, देवी दुर्गा को महागौरी के शांतिपूर्ण अवतार में पूजा जाता है। श्री शांतादुर्गा या संतेरी गोवा की संरक्षक देवी है। महाराष्ट्र में अंबाबाई और तुलजा भवानी के रूपों की पूजा की जाती है।आमतौर पर, भारत में अन्नपूर्णा और ललिता-महात्रिपुरसुंदरी के दो पहलुओं की पूजा की जाती है। श्री शंकर ने अन्नपूर्णा के रूप में दिव्य माँ की शक्ति, सुंदरता और महिमा की प्रशंसा करते हुए एक भक्तिपूर्ण भजन की रचना की, “अन्न का दाता।” `भोजन ‘सांसारिक व्यक्तियों और साधकों या आध्यात्मिक आकांक्षाओं के लिए समान रूप से माँ का वरदान है।भारत में दुर्गा मंदिरभारत में देवी दुर्गा के सबसे उल्लेखनीय मंदिर कोल्हापुर, महाराष्ट्र में अंबाबाई मंदिर, उत्तर कन्नड़ जिले, कर्नाटक में दुर्गम्बा मंदिर; छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में माँ बम्लेश्वरी मंदिर, कोलकाता में कालीघाट मंदिर; उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में कुलंजरी माता मंदिर; कनक दुर्गा मंदिर, विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश; पटना, बिहार में शीतला माता मंदिर; गोवा में शांता दुर्गा मंदिर; माउंट आबू, राजस्थान के पास अंबिका माता मंदिर; तुलजापुर, महाराष्ट्र में तुलजा भवानी मंदिर; बिरजा मंदिर जाजपुर, उड़ीसा में और कई अन्य मंदिर हैं।

दुर्गा माँ By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब देवी दुर्गा ब्रह्माण्ड की जननी देवी का एक अवतार हैं और उन्हें दुनिया के निर्माण, संरक्षण और विनाश के पीछे की ताकत माना जाता है। माँ दुर्गा, जिसका अर्थ है संस्कृत में अजेय, को 10 भुजाओं के रूप में चित्रित किया जाता है, जो बाघ या शेर पर सवार होती हैं। वह अपने हाथों में विभिन्न हथियार रखती हैं जिसमें भगवान विष्णु का चक्र और भगवान शिव का एक कमल का फूल भी शामिल है। देवी दुर्गा अपने चेहरे पर ध्यानपूर्ण मुस्कान से सजी मुद्रा या हाथ के इशारों का अभ्यास करती दिखाई देती हैं। ऐसा माना जाता है कि वह शक्ति का अवतार है और स्वेतन्त्र्य या आत्मनिर्भरता की स्थिति में विद्यमान है। हिंदू देवी दुर्गा तब प्रकट हुई जब देवताओं को महिषासुर की राक्षसी और बुरी शक्तियों से खतरा था। सभी देवताओं ने अपने दिव्य तेज को एकजुट किया और महिषासुर के नेतृत्व में राक्षसों को जीतने के लिए उसे बनाया। परम पूज्य देवी, दुर्गा का वर्णन तत्यारेय ब्राह्मण, तैत्तिरीय-अरण्यका, वाजसनेयी संहिता और यजुर वेद जैसी विभिन्न पांडुलिपियों में किया गया है। इसके अलावा, दुर्गा की उत्पत्ति औ...